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महाराष्ट्र की वीर भूमि जो, अपने शौर्य और बलिदान के लिए सर्व विख्यात है वहीं इसकी गोद में पाषाण शिल्प कलाकृतियों से भरे पूरे जिनालय, देवालय व दुर्ग एक दूसरे से बढचढ़कर हैं। ऐसाही एक प्राचीन व यशस्वी स्थान है - ठाणे नगर। जहाँ कभी जैन धर्म व वैष्णव धर्म के करीब नौ सौ निन्यान्वे मंदिरों की ध्वजापताकाए फहराती थी इसीसे इस नगर की भूतकालीन विशालता का दिग्दर्शन होता है। महाराष्ट्र राज्य के पश्चिम दिशा में स्थित इस नगर की सीमा को पश्चिम में अरब सागर की उछाल तरंगे चरण स्पर्श करती है, वही पूर्व में पश्चिमी घाट संरक्षक के रूप में विद्यमान है दक्षिण में मुंबई नाम का विशाल बन्दरगाह है जो वर्तमान में व्यापारिक गतिविधियों का प्रमुख स्थान है व ठाणे नगर उससे ३५ कि. मी की दूरी पर स्थित है। भुतकाल मै ठाणे भी एक व्यापारिक बन्दरगाह था दूर - दूर के व्यापारी जल व थल मार्ग से यहाँ आते थे और व्यापार करते थे। इस कारण व्यापारियों के लिए यह स्थल सदा ही आकर्षण का केंद्र रहा है। अतीत का स्वर्णिम इतिहास साक्षी है कि इस नगर की समृद्धि में यहाँं के जैन समाज का बहुत बड़ा योगदान रहा है।

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श्री ऋषभदेवजी महाराज जैन धर्म टेम्पल एण्ड ज्ञाती ट्रस्ट ऍप

श्री ऋषभदेवजी महाराज जैन धर्म टेम्पल एण्ड ज्ञाती ट्रस्ट, ठाणा ने आपकी सुविधा के लिए मोबाईल ऍप बनाया है। यह ऍप 'शजैन संघ ठाणा - JST' इस नाम से गूगल प्ले स्टोर पर उपलब्ध है। इस ऍप में आपको मंदिर की जानकारी, दर्शन, चौघड़िया, मंदिर में होने वाले कार्यक्रम, मेंबर डायरेक्टरी, कमिटी, केसरिया भवन आदि की जानकारी मिल सकती है।